जयपुर, राजस्थान में श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की दो विशिष्ट सभाएँ

जो परिस्थितियों से तालमेल बिठाकर निरंतर बढ़ता रहे, वही अध्यात्मवादी है
न्यायमूर्ति माननीय श्री एस.एस. कोठारी, लोकायुक्त, राजस्थान के आवास पर आयोजित हुई विशिष्ट महानुभावों की गोष्ठी

संदेश सार :तनाव से बचने के लिए आवश्यक है
• आध्यात्मिक जीवन शैली अपनाना
• अपनी शक्तियों को पहचानना
• मन को साधना, उसे अपना मित्र बनाना
• आत्मबल बढ़ाने का अभ्यास
• परमात्म चेतना में स्नान का नियमित ध्यान

मनुष्य का परिस्थितियों पर तो वश नहीं, लेकिन वह परिस्थितियों से तालमेल बिठाना तो सीख सकता है। जो परिस्थितियों से तालमेल बिठाना जानता है, सही मायनों में वही सच्चा अध्यात्मवादी है। वही जीवन का सच्चा आनन्द लेना जानता है। वही बाधाओं को चीरकर जीवन में आगे बढ़ता जाता है। जब परिस्थितियों के सामने मन:स्थिति गड़बड़ाने लगती है, तभी व्यक्ति तनावग्रस्त होने लगता है। यह तनाव ही आज बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने न्यायमूर्ति माननीय श्री एस.एस. कोठारी, लोकायुक्त, राजस्थान द्वारा अपने आवास पर आयोजित विशिष्ट महानुभावों की संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। वे लगभग १५० सुप्रसिद्ध न्यायविदों, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रतिष्ठित व्यापारियों एवं समाज के गणमान्य विद्वानों के समक्ष च्तनाव परावर्तन के लिए ध्यान एवं जीवन प्रबंधनज् विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

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