६० वर्षीय गरीब वनवासी ने बरसाती नाले पर बनाये दो बाँध

१० वर्ष के श्रम से अकेले ही बरसाती नाले पर बनाये दो बाँध

जो लोग पहले मजाक उड़ाते थे, वे अब सराहते नहीं थकते
१०० घरों को पानी की समस्या से छुटकारा मिला
मनेन्द्रगढ़, बिलासपुर। छत्तीसगढ़
सफलताएँ सुविधा- साधनों से नहीं मिला करतीं। बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प हो तो सफलता की ऊँची- ऊँची उड़ान भरी जा सकती है। एक अत्यंत गरीब वनवासी गनपत सिंह गोंड़ की कहानी इसी तथ्य को सत्यापित करती है। ६० वर्षीय गनपत सिंह गोंड़ ने अपनी १० वर्षों की अथक मेहनत से अकेले ही पहाड़ी नाले पर १२- १२ फीट के दो अस्थाई बाँध बना लेने का करिश्मा किया है, जिनसे उस क्षेत्र के १०० घरों को पानी मिल रहा है।

गनपत सिंह गोंड़ मूलत: मंडला निवासी है। बहन की शादी होने पर वह भी साथ खडगवाँ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत जरौंधा आ गया। फिर अपने परिवार के साथ मनेंद्रगढ़ आकर वन- भूमि पर झोपड़ी बनाकर रहने लगा। तराई में पानी की काफी समस्या थी। वहाँ न कोई हैंडपंप था और न ही आसपास कहीं नदी और कुँआ। घर से कुछ ही दूरी पर पहाड़ के किनारे से एक बरसाती नाला बहता था। गनपत सिंह गौंड केवल अपनी ही नहीं, सबकी भलाई सोची और नाले पर अस्थाई बाँध

You may also like...